Sunday, December 4, 2016

कैसे करे महामृत्युंजय मन्त्र साधना और प्रयोग ??

“महामृत्युंजय मंत्र” भगवान शिव का सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस मंत्र को प्राण रक्षक और महामोक्ष मंत्र कहा जाता है। मान्यता है कि म प्रिय हामृत्युंजय मंत्र से शिवजी को प्रसन्न करने वाले जातक से मृत्यु भी डरती है। इस मंत्र को सिद्ध करने वाला जातक निश्चित ही मोक्ष को प्राप्त करता है। यह मंत्र ऋषि मार्कंडेय द्वारा सबसे पहले पाया गया था।भगवान शिव को कालों का काल महाकाल कहा जाता है। मृत्यु अगर निकट आ जाए और आप महाकाल के महामृत्युंजय मंत्र का जप करने लगे तो यमराज की भी हिम्मत नहीं होती है कि वह भगवान शिव के भक्त को अपने साथ ले जाए।

इस मंत्र की शक्ति से जुड़ी कई कथाएं शास्त्रों और पुराणों में मिलती है जिनमें बताया गया है कि इस मंत्र के जप से गंभीर रुप से बीमार व्यक्ति स्वस्थ हो गए और मृत्यु के मुंह में पहुंच चुके व्यक्ति भी दीर्घायु का आशीर्वाद पा गए। यही कारण है कि ज्योतिषी और पंडित बीमार व्यक्तियों को और ग्रह दोषों से पीड़ित व्यक्तियों को महामृत्युंजय मंत्र जप करवाने की सलाह देते हैं। शिव को अति प्रसन्न करने वाला मंत्र है महामृत्युंजय मंत्र। लोगों कि धारणा है कि इसके जाप से व्यक्ति की मृत्यु नहीं होती परंतु यह पूरी तरह सही अर्थ नहीं है।

महामृत्युंजय का अर्थ है महामृत्यु पर विजय अर्थात् व्यक्ति की बार-बार मृत्यु ना हो। वह मोक्ष को प्राप्त हो जाए। उसका शरीर स्वस्थ हो, धन एवं मान की वृद्धि तथा वह जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाए। महामृत्युञ्जय मंत्र यजुर्वेद के रूद्र अध्याय स्थित एक मंत्र है। इसमें शिव की स्तुति की गयी है। शिव को ‘मृत्यु को जीतने वाला’ माना जाता है। कहा जाता है कि यह मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी असीम कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। इस मंत्र का सवा लाख बार निरंतर जप करने से आने वाली अथवा मौजूदा बीमारियां तथा अनिष्टकारी ग्रहों का दुष्प्रभाव तो समाप्त होता ही है, इस मंत्र के माध्यम से अटल मृत्यु तक को टाला जा सकता है।

हमारे वैदिक शास्त्रों और पुराणों में असाध्य रोगों से मुक्ति और अकाल मृत्यु से बचने के लिए महामृत्युंजय जप करने का विशेष उल्लेख मिलता है। महामृत्युंजय भगवान शिव को खुश करने का मंत्र है। इसके प्रभाव से इंसान मौत के मुंह में जाते-जाते बच जाता है, मरणासन्न रोगी भी महाकाल शिव की अद्भुत कृपा से जीवन पा लेता है। बीमारी, दुर्घटना, अनिष्ट ग्रहों के प्रभावों से दूर करने, मौत को टालने और आयु बढ़ाने के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र जप करने का विधान है।

शिव के साधक को न तो मृत्यु का भय रहता है, न रोग का, न शोक का। शिव तत्व उनके मन को भक्ति और शक्ति का सामर्थ देता है। शिव तत्व का ध्यान महामृत्युंजय के रूप में किया जाता है। इस मंत्र के जप से शिव की कृपा प्राप्त होती है। सतयुग में मूर्ति पूजा कर सकते थे, पर अब कलयोग में सिर्फ मूर्ति पूजन काफी नहीं है। भविष्य पुराण यह बताया गया है कि महामृत्युंजय मंत्र का रोज़ जाप करने से उस व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और लम्बी उम्र मिलती है।

अगर आपकी कुंडली में किसी भी तरह से मास, गोचर, अंतर्दशा या अन्य कोई परेशानी है तो यह मंत्र बहुत मददगार साबित होता है। अगर आप किसी भी रोग या बीमारी से ग्रसित हैं तो रोज़ इसका जाप करना शुरू कर दें, लाभ मिलेगा। यदि आपकी कुंडली में किसी भी तरह से मृत्यु दोष या मारकेश है तो इस मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जप करने से किसी भी तरह की महामारी से बचा जा सकता है साथ ही पारिवारिक कलह, संपत्ति विवाद से भी बचता है। अगर आप किसी तरह की धन संबंधी परेशानी से जूझ रहें है या आपके व्यापार में घाटा हो रहा है तो इस मंत्र का जप करें। इस मंत्र में आरोग्यकर शक्तियां है जिसके जप से ऐसी दुवानियां उत्पन होती हैं जो आपको मृत्यु के भय से मुक्त कर देता है, इसीलिए इसे मोक्ष मंत्र भी कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र का जप करने के लिए सुबह 2 से 4 बजे का समय सबसे उत्तम माना गया है, लेकिन अगर आप इस वक़्त जप नहीं कर पाते हैं तो सुबह उठ कर स्नान कर साफ़ कपडे पहने फिर कम से कम पांच बार रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करें।

स्नान करते समय शरीर पर लोटे से पानी डालते वक्त इस मंत्र का लगातार जप करते रहने से स्वास्थ्य-लाभ होता है। दूध में निहारते हुए यदि इस मंत्र का कम से कम 11 बार जप किया जाए और फिर वह दूध पी लें तो यौवन की सुरक्षा भी होती है। इस चमत्कारी मन्त्र का नित्य पाठ करने वाले व्यक्ति पर भगवान शिव की कृपा निरन्तंर बरसती रहती है ।

महामृत्युंजय मंत्र का जप करना परम फलदायी है, लेकिन इस मंत्र के जप में कुछ सावधानियां बरतना चाहिए जिससे कि इसका संपूर्ण लाभ आपको मिले और आपको कोई हानि न हो। अगर आप नही कर पा रहे इस मंत्र का जाप जो किसी पंडित से जाप कराए यह आपके लिए और अधिक लाभकारी होगा। तीनों भुवनों की अपार सुंदरी गौरां को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों व पिशाचों से घिरे रहते हैं। उनका रूप बड़ा अजीब है। शरीर पर मसानों की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटाओं में जगत-तारिणी पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है। बैल को वाहन के रूप में स्वीकार करने वाले शिव अमंगल रूप होने पर भी भक्तों का मंगल करते हैं और श्री-संपत्ति प्रदान करते हैं।

महारूद्र सदाशिव को प्रसन्न करने व अपनी सर्वकामना सिद्धि के लिए यहां पर पार्थिव पूजा का विधान है, जिसमें मिटटी के शिर्वाचन पुत्र प्राप्ति के लिए, श्याली चावल के शिर्वाचन व अखण्ड दीपदान की तपस्या होती है। शत्रुनाश व व्याधिनाश हेतु नमक के शिर्वाचन, रोग नाश हेतु गाय के गोबर के शिर्वाचन, दस विधि लक्ष्मी प्राप्ति हेतु मक्खन के शिर्वाचन अन्य कई प्रकार के शिवलिंग बनाकर उनमें प्राण-प्रतिष्ठा कर विधि-विधान द्वारा विशेष पुराणोक्त व वेदोक्त विधि से पूज्य होती रहती है ||

भारतीय संस्कृति में शिवजी को भुक्ति और मुक्ति का प्रदाता माना गया है। शिव पुराण के अनुसार वह अनंत और चिदानंद स्वरूप हैं। वह निर्गुण, निरुपाधि, निरंजन और अविनाशी हैं। वही परब्रह्म परमात्मा शिव कहलाते हैं। शिव का अर्थ है कल्याणकर्ता। उन्हें महादेव (देवों के देव) और महाकाल अर्थात काल के भी काल से संबोधित किया जाता है। केवल जल, पुष्प और बेलपत्र चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाने के कारण उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है। उनके अन्य स्वरूप अर्धनारीश्वर, महेश्वर, सदाशिव, अंबिकेश्वर, पंचानन, नीलकंठ, पशुपतिनाथ, दक्षिणमूर्ति आदि हैं। पुराणों में ब्रह्मा, विष्णु, श्रीराम, श्रीकृष्ण, देवगुरु बृहस्पति तथा अन्य देवी देवताओं द्वारा शिवोपासना का विवरण मिलता है।

जब किसी की अकालमृत्यु किसी घातक रोग या दुर्घटना के कारण संभावित होती हैं तो  इससे बचने का एक ही उपाय है – महामृत्युंजय साधना। यमराज के मृत्युपाश से छुड़ाने वाले केवल भगवान मृत्युंजय शिव हैं जो अपने साधक को दीर्घायु देते हैं। इनकी साधना एक ऐसी प्रक्रिया है जो कठिन कार्यों को सरल बनाने की क्षमता के साथ-साथ विशेष शक्ति भी प्रदान करती है। यह साधना श्रद्धा एवं निष्ठापूर्वक करनी चाहिए। इसके कुछ प्रमुख तथ्य यहां प्रस्तुत हैं, जिनका साधना काल में ध्यान रखना परमावश्यक है। अनुष्ठान शुभ दिन, शुभ पर्व, शुभ काल अथवा शुभ मुहूर्त में संपन्न करना चाहिए। मंत्रानुष्ठान प्रारंभ करते समय सामने भगवान शंकर का शक्ति सहित चित्र एवं महामृत्युंजय यंत्र स्थापित कर लेना चाहिए।

ज्योतिष अनुसार किसी जन्मकुण्डली में सूर्यादि ग्रहों के द्वारा किसी प्रकार की अनिष्ट की आशंका हो या मारकेश आदि लगने पर, किसी भी प्रकार की भयंकर बीमारी से आक्रान्त होने पर, अपने बन्धु-बन्धुओं तथा इष्ट-मित्रों पर किसी भी प्रकार का संकट आने वाला हो। देश-विदेश जाने या किसी प्राकर से वियोग होने पर, स्वदेश, राज्य व धन सम्पत्ति विनष्ट होने की स्थिति में, अकाल मृत्यु की शान्ति एंव अपने उपर किसी तरह की मिथ्या दोषारोपण लगने पर, उद्विग्न चित्त एंव धार्मिक कार्यो से मन विचलित होने पर महामृत्युंजय मन्त्र का जप स्त्रोत पाठ, भगवान शंकर की आराधना करें। यदि स्वयं न कर सके तो किसी पंडित द्वारा कराना चाहिए। इससे सद्बुद्धि, मनःशान्ति, रोग मुक्ति एंव सवर्था सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

अनिष्ट ग्रहों का निवारण मारक एवं बाधक ग्रहों से संबंधित दोषों का निवारण महामृत्युंजय मंत्र की आराधना से संभव है। मान्यता है कि बारह ज्योतिर्लिगों के दर्शन मात्र से समस्त बारह राशियों संबंधित शुभ फलों की प्राप्ति होती है। काल संबंधी गणनाएं ज्योतिष का आधार हैं तथा शिव स्वयं महाकाल हैं, अत: विपरीत कालखंड की गति महामृत्युंजय साधना द्वारा नियंत्रित की जा सकती है।

जन्म पत्रिका में काल सर्पदोष, चंद्र-राहु युति से जनित ग्रहण दोष, मार्केश एवं बाधकेश ग्रहों की दशाओं में, शनि के अनिष्टकारी गोचर की अवस्था में महामृत्युंजय का प्रयोग शीघ्र फलदायी है। इसके अलावा विषघटी, विषकन्या, गंडमूल एवं नाड़ी दोष आदि अनेकानेक दोषों को निमरूल करने की क्षमता इस मंत्र में है।

जानिए आपकी राशि अनुसार महामृत्युंजय मंत्र जाप के लाभ––

मेष—महामृत्युंजय जाप से भूमि-भवन संबंधी परेशानियों एवं कार्यो में लाभ। व्यापार में विस्तार।

वृषभ- उत्साह एवं ऊर्जा की प्राप्ति होगी। भाई-बहनों से पूर्ण सुख एवं सहयोग मिलता रहेगा।

मिथुन- आर्थिक लाभ। स्वास्थ्य संबंघी बाधाओं एवं पीड़ाओं की निवृत्ति हेतु अचूक। पारिवारिक सुख।

कर्क- इस मंत्र का जाप करते रहें। जीवन का सर्वागीण विकास होगा।

सिंह- अनावश्यक प्रवृत्तियों पर अंकुश। आराम दायक नींद एवं पारिवारिक सुख की प्राप्ति।

कन्या- धन-धान्य संबंधी लाभ। मनोकामनाओं की पूर्ति। सुख एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति।

तुला- कार्य क्षेत्र में सफलताएं मिलेगी। व्यापारिक अवरोधों समाप्त होंगे। पदोन्नति हेतु विशेष लाभप्रद।

वृश्चिक- भाग्योदय कारक है। आध्यात्मिक उन्नति की संभावनाएं बनेंगी।

धनु- पैतृक संपत्ति की प्राप्ति। दुर्घटनाओं एवं आकस्मिक आपदाओं से रक्षा।

मकर- सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति। दांपत्य जीवन में मधुरता एवं व्यापारिक उन्नति के अवसर।

कुंभ- शत्रु एवं ऋण संबंधी सारे दोष दूर होंगे। प्रतियोगिताओं एवं वाद-विवाद में सफलताएं मिलेगी।

मीन- मानसिक स्थिरता। संतानोत्पत्ति। शिक्षा संबंधी बाधाओं का निवारण।

महामृत्युंजय के अनुष्ठान एंव लधु रूद्र, महारूद्र तथा सामान्य रूद्राअभिषेक प्रायः होते ही रहते है, लेकिन विशेष कामनाओं के लिए शिर्वाचन का अपना अलग विशेष महत्व होता है। महारूद्र सदाशिव को प्रसन्न करने व अपनी सर्वकामना सिद्धि के लिए यहां पर पार्थिव पूजा का विधान है, जिसमें मिटटी के शिर्वाचन पुत्र प्राप्ति के लिए, श्याली चावल के शिर्वाचन व अखण्ड दीपदान की तपस्या होती है। शत्रुनाश व व्याधिनाश हेतु नमक के शिर्वाचन, रोग नाश हेतु गाय के गोबर के शिर्वाचन, दस विधि लक्ष्मी प्राप्ति हेतु मक्खन के शिर्वाचन अन्य कई प्रकार के शिवलिंग बनाकर उनमें प्राण-प्रतिष्ठा कर विधि-विधान द्वारा विशेष पुराणोक्त व वेदोक्त विधि से पूज्य होती रहती है।

महामृत्युंजय मंत्र के जप व उपासना के तरीके आवश्यकता के अनुरूप होते हैं। काम्य उपासना के रूप में भी इस मंत्र का जप किया जाता है। जप के लिए अलग-अलग मंत्रों का प्रयोग होता है। मंत्र में दिए अक्षरों की संख्या से इनमें विविधता आती है।

यह मंत्र निम्न प्रकार से है-

एकाक्षरी(1) मंत्र- ‘हौं’ ।

त्र्यक्षरी(3) मंत्र- ‘ॐ जूं सः’।

चतुराक्षरी(4) मंत्र- ‘ॐ वं जूं सः’।

नवाक्षरी(9) मंत्र- ‘ॐ जूं सः पालय पालय’।

दशाक्षरी(10) मंत्र- ‘ॐ जूं सः मां पालय पालय’।

(स्वयं के लिए इस मंत्र का जप इसी तरह होगा जबकि किसी अन्य व्यक्ति के लिए यह जप किया जा रहा हो तो ‘मां’ के स्थान पर उस व्यक्ति का नाम लेना होगा)

ऊॅ हौं जूं सः। ऊॅ भूः भुवः स्वः ऊॅ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उव्र्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ऊॅ स्वः भुवः भूः ऊॅ। ऊॅ सः जूं हौं।

================================================================

जानिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते वक्त किस बातों का ध्यान रखना चाहिए—-

प्रत्यक्षं ज्योतिषं शास्त्रम्‌ अर्थात्‌ ज्योतिष प्रत्यक्ष शास्त्र है। फलित ज्योतिष में महादशा एवं अन्तर्दशा का बड़ा महत्व है। वृहत्पाराशर होराशास्त्र में अनेकानेक दशाओं का वर्णन है। आजकल विंशोत्तरी दशा का प्रचलन है। मारकेश ग्रहों की दशा एवं अन्तर्दशा में महामृत्युंजय प्रयोग फलदायी है।

जन्म, मास, गोचर, अष्टक आदि में ग्रहजन्य पीड़ा के योग, मेलापक में नाड़ी के योग, मेलापक में नाड़ी दोष की स्थिति, शनि की साढ़ेसाती, अढय्या शनि, पनौती (पंचम शनि), राहु-केतु, पीड़ा, भाई का वियोग, मृत्युतुल्य विविध कष्ट, असाध्य रोग, त्रिदोषजन्य महारोग, अपमृत्युभय आदि अनिष्टकारी योगों में महामृत्युंजय प्रयोग रामबाण औषधि है।

शनि की महादशा में शनि तथा राहु की अनिष्टकारी अन्तर्दशा, केतु में केतु तथा गुरु की अनिष्टकारी अन्तर्दशा, रवि की महादशा में रवि की अनिष्टकारी अंतर्दशा, चन्द्र की महादशा में बृहस्पति, शनि, केतु, शुक तथा सूर्य की अनिष्टकारी अन्तर्दशा, मंगल तथा राहु की अनिष्टकारी अन्तर्दशा, राहु की महादशा में गुरु की अनिष्टकारी अन्तर्दशा, शुक्र की महादशा में गुरु की अनिष्टकारी अन्तर्दशा, मंगल तथा राहु की अन्तर्दशा, गुरु की महादशा में गुरु की अनिष्टकारी अंतर्दशा, बुध की महादशा में मंगल-गुरु तथा शनि की अनिष्टकारी अन्तर्दशा आदि इस प्रकार मारकेश ग्रह की दशा अन्तर्दशा में सविधि मृत्युंजय जप, रुद्राभिषेक एवं शिवार्जन से ग्रहजन्य एवं रोगजन्य अनिष्टकारी बाधाएँ शीघ्र नष्ट होकर अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।

उपर्युक्त अनिष्टकारी योगों के साथ ही अभीष्ट सिद्धि, पुत्र प्राप्ति, राजपद प्राप्ति, चुनाव में विजयी होने, मान-सम्मान, धन लाभ, महामारी आदि विभिन्न उपद्रवों, असाध्य एवं त्रिदोषजन्य महारोगादि विभिन्न प्रयोजनों में सविधि प्रमाण सहित महामृत्युंजय जप से मनोकामना पूर्ण होती है।

विभिन्न प्रयोजनों में अनिष्टता के मान से 1 करोड़ 24 लाख, सवा लाख, दस हजार या एक हजार महामृत्युंजय जप करने का विधान उपलब्ध होता है। मंत्र दिखने में जरूर छोटा दिखाई देता है, किन्तु प्रभाव में अत्यंत चमत्कारी है।

देवता मंत्रों के अधीन होते हैं- मंत्रधीनास्तु देवताः। मंत्रों से देवता प्रसन्न होते हैं। मंत्र से अनिष्टकारी योगों एवं असाध्य रोगों का नाश होता है तथा सिद्धियों की प्राप्ति भी होती है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद, तैत्तिरीय संहिता एवं निरुवतादि मंत्र शास्त्रीय ग्रंथों में त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्‌ उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। उक्त मंत्र मृत्युंजय मंत्र के नाम से प्रसिद्ध है।

शिवपुराण में सतीखण्ड में इस मंत्र को ‘सर्वोत्तम’ महामंत्र’ की संज्ञान से विभूषित किया गया है- मृत संजीवनी मंत्रों मम सर्वोत्तम स्मृतः। इस मंत्र को शुक्राचार्य द्वारा आराधित ‘मृतसंजीवनी विद्या’ के नाम से भी जाना जाता है। नारायणणोपनिषद् एवं मंत्र सार में- मृत्युर्विनिर्जितो यस्मात तस्मान्यमृत्युंजय स्मतः अर्थात्‌ मृत्यु पर विजय प्राप्त करने के कारण इन मंत्र योगों को ‘मृत्युंजय’ कहा जाता है। सामान्यतः मंत्र तीन प्रकार के होते हैं- वैदिक, तांत्रिक, एवं शाबरी। इनमें वैदिक मंत्र शीघ्र फल देने वाले त्र्यम्बक मंत्र भी वैदिक मंत्र हैं।

मृत्युंजय जप, प्रकार एवं प्रयोगविधि का मंत्र महोदधि, मंत्र महार्णव, शारदातिक, मृत्युंजय कल्प एवं तांत्र, तंत्रसार, पुराण आदि धर्मशास्त्रीय ग्रंथों में विशिष्टता से उल्लेख है। मृत्युंजय मंत्र तीन प्रकार के हैं- पहला मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र। पहला मंत्र तीन व्यह्यति- भूर्भुवः स्वः से सम्पुटित होने के कारण मृत्युंजय, दूसरा ॐ हौं जूं सः (त्रिबीज) और भूर्भुवः स्वः (तीन व्याह्यतियों) से सम्पुटित होने के कारण ‘मृतसंजीवनी’ तथा उपर्युक्त हौं जूं सः (त्रिबीज) तथा भूर्भुवः स्वः (तीन व्याह्यतियों) के प्रत्येक अक्षर के प्रारंभ में ॐ का सम्पुट लगाया जाता है। इसे ही शुक्राचार्य द्वारा आराधित महामृत्युंजय मंत्र कहा जाता है।

इस प्रकार वेदोक्त ‘त्र्यम्बकं यजामहे’ मंत्र में ॐ सहित विविध सम्पुट लगने से उपर्युक्त मंत्रों की रचना हुई है। उपर्युक्त तीन मंत्रों में मृतसंजीवनी मंत्र ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्‌ ॐ स्वः भुवः ॐ सः जूं हौं ॐ।

यह मंत्र सर्वाधिक प्रचलित एवं फल देने वाला माना गया है। कुछ लघु मंत्र भी प्रयोग में आते हैं, जैसे- त्र्यक्षरी अर्थात तीन अक्षरों वाला ॐ जूं सः पंचाक्षरी ॐ हौं जूं सः ॐ तथा ॐ जूं सः पालय पालय आदि। ॐ हौं जूं सः पालय पालय सः जूं हौं ॐ। हौं जूं सः पालय पालय सः जूं हौं ॐ।

इस मंत्र के 11 लाख अथवा सवा लाख जप का मृत्युंजय कवच यंत्र के साथ जप करने का विधान भी है। यंत्र को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर पुरुष के दाहिने तथा स्त्री के बाएँ हाथ पर बाँधने से असाध्य रोगों से मुक्ति होती है। सर्वप्रथम यंत्र की सविधि विभिन्न पूजा उपचारों से पूजा-अर्चना करना चाहिए, पूजा में विशेष रूप से आंकड़े, एवं धतूरे का फूल, केसरयुक्त, चंदन, बिल्वपत्र एवं बिल्वफल, भांग एवं जायफल का नैवेद्य आदि।

मंत्र जप के पश्चात्‌ सविधि हवन, तर्पण एवं मार्जन करना चाहिए। मंत्र प्रयोग विधि सुयोग्य वैदिक विद्वान आचार्य के आचार्यत्व या मार्गदर्शन में सविधि सम्पन्न हो तभी यथेष्ठ की प्राप्ति होती है, अन्यथा अर्थ का अनर्थ होने की आशंका हो सकती है।

मृत्युंजय शिव का स्वरूप भगवान शिव की पांच कलाएं उपनिषदों में वर्णित हैं, 1- आनंद 2- विज्ञान 3- मन 4- प्राण 5- वाक। शिव की आनंद नामक कला उनका महामृत्यंजय स्वरूप है। विज्ञानकला दक्षिणामूर्ति शिव, मन कला कामेश्वर, प्राणकला पशुपति शिव एवं वाक कला भूतेशभावन शिव कहलाती है। उपनिषदों की व्याख्या के आधार पर जीवन में आनंद प्राप्ति के निमित्त शिव के मृत्युंजय स्वरूप की आराधना आदि काल से प्रचलित है।

महामृत्युंजय शिव षड्भुजा धारी हैं, जिनमें से चार भुजाओं में अमृत कलश रखते हैं, अर्थात् वे अमृत से स्नान करते हैं, अमृत का ही पान करते हैं एवं अपने भक्तों को भी अमृत पान कराते हुए अजर-अमर कर देते हैं। इनकी शक्ति भगवती अमृतेश्वरी हैं।

वेदोक्त मंत्र-

महामृत्युंजय का वेदोक्त मंत्र निम्नलिखित है-

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌ ॥

इस मंत्र में 32 शब्दों का प्रयोग हुआ है और इसी मंत्र में ॐ’ लगा देने से 33 शब्द हो जाते हैं। इसे ‘त्रयस्त्रिशाक्षरी या तैंतीस अक्षरी मंत्र कहते हैं। श्री वशिष्ठजी ने इन 33 शब्दों के 33 देवता अर्थात्‌ शक्तियाँ निश्चित की हैं जो कि निम्नलिखित हैं।

इस मंत्र में 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य 1 प्रजापति तथा 1 वषट को माना है।

मंत्र विचार :—

इस मंत्र में आए प्रत्येक शब्द को स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि शब्द ही मंत्र है और मंत्र ही शक्ति है। इस मंत्र में आया प्रत्येक शब्द अपने आप में एक संपूर्ण अर्थ लिए हुए होता है और देवादि का बोध कराता है।

शब्द बोधक शब्द बोधक

‘त्र’ ध्रुव वसु ‘यम’ अध्वर वसु

‘ब’ सोम वसु ‘कम्‌’ वरुण

‘य’ वायु ‘ज’ अग्नि

‘म’ शक्ति ‘हे’ प्रभास

‘सु’ वीरभद्र ‘ग’ शम्भु

‘न्धिम’ गिरीश ‘पु’ अजैक

‘ष्टि’ अहिर्बुध्न्य ‘व’ पिनाक

‘र्ध’ भवानी पति ‘नम्‌’ कापाली

‘उ’ दिकपति ‘र्वा’ स्थाणु

‘रु’ भर्ग ‘क’ धाता

‘मि’ अर्यमा ‘व’ मित्रादित्य

‘ब’ वरुणादित्य ‘न्ध’ अंशु

‘नात’ भगादित्य ‘मृ’ विवस्वान

‘त्यो’ इंद्रादित्य ‘मु’ पूषादिव्य

‘क्षी’ पर्जन्यादिव्य ‘य’ त्वष्टा

‘मा’ विष्णुऽदिव्य ‘मृ’ प्रजापति

‘तात’ वषट

इसमें जो अनेक बोधक बताए गए हैं। ये बोधक देवताओं के नाम हैं।

शब्द की शक्ति-

शब्द वही हैं और उनकी शक्ति निम्न प्रकार से है-

शब्द शक्ति शब्द शक्ति

‘त्र’ त्र्यम्बक, त्रि-शक्ति तथा त्रिनेत्र ‘य’ यम तथा यज्ञ

‘म’ मंगल ‘ब’ बालार्क तेज

‘कं’ काली का कल्याणकारी बीज ‘य’ यम तथा यज्ञ

‘जा’ जालंधरेश ‘म’ महाशक्ति

‘हे’ हाकिनो ‘सु’ सुगन्धि तथा सुर

‘गं’ गणपति का बीज ‘ध’ धूमावती का बीज

‘म’ महेश ‘पु’ पुण्डरीकाक्ष

‘ष्टि’ देह में स्थित षटकोण ‘व’ वाकिनी

‘र्ध’ धर्म ‘नं’ नंदी

‘उ’ उमा ‘र्वा’ शिव की बाईं शक्ति

‘रु’ रूप तथा आँसू ‘क’ कल्याणी

‘व’ वरुण ‘बं’ बंदी देवी

‘ध’ धंदा देवी ‘मृ’ मृत्युंजय

‘त्यो’ नित्येश ‘क्षी’ क्षेमंकरी

‘य’ यम तथा यज्ञ ‘मा’ माँग तथा मन्त्रेश

‘मृ’ मृत्युंजय ‘तात’ चरणों में स्पर्श

यह पूर्ण विवरण ‘देवो भूत्वा देवं यजेत’ के अनुसार पूर्णतः सत्य प्रमाणित हुआ है।

महामृत्युंजय के अलग-अलग मंत्र हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार जो भी मंत्र चाहें चुन लें और नित्य पाठ में या आवश्यकता के समय प्रयोग में लाएँ। मंत्र निम्नलिखित हैं-

तांत्रिक बीजोक्त मंत्र-
ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय व मामृततस्वः भुवः भूः ॐ ॥

संजीवनी मंत्र अर्थात्‌ संजीवनी विद्या-
ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूर्भवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनांन्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ ।

महामृत्युंजय का प्रभावशाली मंत्र-
ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ

अज्ञात स्रोत से सादर।

Friday, October 21, 2016

એક પિતાનો પુત્રને ખુલ્લો પત્ર....

એક પિતાનો પત્ર :

પ્રિય પુત્ર,
આ પત્ર હું તને ૩ કારણોસર લખું છું ..

૧) જીવન, નસીબ અને મૃત્યું કોઈ જાણી શક્યું નથી. તો અમુક વાત જરૂરી છે કે વહેલા માં વહેલી જ કહી દેવાય .

૨) હું તારો પિતા છું અને આવી વાત જો હું નહિ કહું તો તને કોઈ જ નહિ કહી શકે.

૩) આ બધી વાત હું મારા અનુભવ થી કહું છું અને જો હું નહિ કહું તો પણ તું તારા જીવન થી શીખીશ જ પણ ત્યારે તને વધુ તકલીફ પડશે અને કદાચ સમય પણ નહિ હોય.. જીવન સારૂ ને શાંતિ થી જીવવા આટલું જ કરજે

૧) જો કોઈ તારી સાથે સારો વ્યવહાર ના કરે તો મન માં ના લાવીશ. તારી સાથે સારી રીતે વર્તવા ની ફરજ ફક્ત મારી અને તારી મમ્મીની જ છે. બાકી દુનિયા નો કોઈ પણ વ્યક્તિ તને દુઃખ આપી શકે છે. તો એના માટે માનસિક રીતે હંમેશા તૈયાર જ રહેવું . કોઈ પણ તારી સાથે સારું વર્તન કરે તો એનો આભાર વ્યક્ત કરવો પણ હંમેશા સાવચેત રહેવું. આ દુનિયામાં મારી અને તારા મમ્મી સિવાય બધા નો સારો વ્યવહાર પાછળ કોઈ હેતુ / સ્વાર્થ પણ હોઈ શકે. ઉતાવળ માં કોઈ ને સારા મિત્ર ના માની લેવા.

૨) દુનિયા માં કોઈ પણ એવી વસ્તુ નથી કે જેના વગર જીવી ન શકાય. આ વાત તને ખાસ કામ લાગશે જયારે તને કોઈ તરછોડી દેશે કે તારી પસંદ ની વ્યક્તિ કે વસ્તુ તને નહિ મળે. જીંદગી ચાલ્યા જ કરે છે અને બધી વસ્તુ કે વ્યક્તિ વગર ખુશ રહેતા શીખ જે .

૩) જીંદગી ટૂંકી છે. જો તું આજનો દિવસ વેડફીશ
તો કાલે તને જીંદગી પૂરી થતી લાગશે. તો જીંદગી ના દરેક દિવસ દરેક પલ નો સદુપયોગ કર.

૪) પ્રેમ બીજું કઈ નથી પણ એક બદલાતી લાગણી જ છે જે સમય અને સંજોગો સાથે બદલાતી રહે છે. તો તારો પ્રેમ તને છોડી જાય તો સંયમ રાખ. સમય દરેક દર્દ ને ભુલાવે જ છે. કોઈ ની સુંદરતા અથવા પ્રેમ માં જરૂરત કરતા વધુ ડૂબી નો જવું એમ જ કોઈ ના દુઃખ માં પણ જરૂર કરતા વધુ પરેશાન ન થવું.

૫) અભ્યાસ માં ઘણા નબળા માણસો પણ સફળ બન્યા છે. પણ એનો મતલબ એ નથી કે અભણ કે અભ્યાસ માં નબળો માણસ સફળ જ થાય. વિદ્યા થી વધુ કશું જ નથી. ભણવા ના સમયે ધગશ થી ભણો.

૬) હું નથી ઈચ્છતો કે નથી આશા રાખતો કે તું મને મારા વૃદ્ધ સમય માં મદદ કરે. અથવા હું પણ તને આખી જીંદગી સહારો આપી શકીશ કે નહિ? મારી ફરજ તને મોટો કરી, સારું ભણતર આપી પૂરી થાય છે. એ પછી તું limousine / BMW માં ફરીશ કે પછી સરકારી બસ માં એ તારી મહેનત અને આવડત ઉપર નિર્ભર છે.

૭) તું તારું વચન હંમેશા પાળજે. પણ બીજા એમનું વચન પાળશે જ એવી આશા ન રાખવી. તું સારું કર પણ બીજા સારું જ કરશે એવી આશા પણ ન રાખવી. જો આ વાત તને સમજાઇ જશે તો તારા જીવન ના મોટા ભાગ ના દુઃખ દૂર થઇ જશે.

૮) મેં ઘણી લોટરી ની ટીકીટ ખરીદી છે. પણ એક પણ લાગી નથી. જીવન માં એમ નસીબ થી જ અમીર થવાતું નથી. એના માટે ખુબ મહેનત કરવી જ પડે છે. તો મહેનત થી કોઈ દિવસ ભાગતો નહિ.

૯) જીવન ખુબ જ ટૂંકું છે અને કાળ નો ભરોસો નથી તો જેટલો વધુ સમય આપણે સાથે વિતાવી શકીએ વિતાવી લઈએ કારણ કે આવતો જનમ તો આવશે જ પણ એ જનમ માં આપણે મળશું કે નહિ તે ખબર નથી . તો આ જનમ માં વધુ માં વધુ સમય પરિવાર સાથે વિતાવો.

Thursday, October 6, 2016

मंत्र

मंत्र क्या है ? | What is mantra in hindi

मन्त्रों से होने वाली तरंगें, उनके अर्थ से ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं | ये मन्त्र ऋषियों द्वारा डाउनलोड किये गए थे | वे ध्यान में बैठे, और उन्हें कुछ प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने डाउनलोड (download) करके लोगों को सौंप दिया| तो इसे एक तरंग के रूप में प्राप्त किया गया, इसे बुद्धि की सजगता से बैठ कर, लिख कर नहीं किया गया था |

ये मन्त्र अंतर्ज्ञान के स्तर से आये हैं, शुद्ध चेतना से आये हैं |देखिये, यदि आप बैठ कर सोचेंगे और फिर कुछ करेंगे, और कुछ शब्दों को जोड़कर उन्हें अर्थ देंगे, तो वो एक अलग बात हो जाती है | लेकिन, ऐसा कुछ जो आपके अंदर से आता है, जैसे कोई कविता, जैसे अंतर्ज्ञान, तब उसका विस्तार हो सकता है और आने वाली पीढ़ियों में उसे और अधिक जाना जा सकता है | और जब जब आप उसका विश्लेषण करेंगे, तो कोई न कोई नया अर्थ सामने आएगा और इन्ही को मन्त्र कहते हैं |

मंत्रो के लाभ ? | Benefits of mantras

‘मननत त्रायते इति मन्त्रः’ -  जब आप इस पर मनन करते हैं, तो आपकी ऊर्जा बढ़ती है| ऐसा कहा गया है| मन्त्रों के अर्थ ज़रूर होते हैं, लेकिन इनका अर्थ केवल हिमशिला के कोने जैसा है| अर्थ इतना ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है, उसकी तरंगें ज्यादा महत्वपूर्ण हैं |

ब्रह्माण्ड में हर किसी का एक दुसरे पर प्रभाव पड़ता है | जब आपमंत्रोचारण या हवन करते हैं तों उसका वातावरण पर अत्यंत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है | इससे आपको बहुत अच्छे कंपन प्राप्त होते हैं और पूरे वातावरण में सकारात्मक आयनों की वृद्धि होती हैं |

जब हम गायत्री मंत्र  का उच्चारण करते हैं,  क्या उसका कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, या केवल भाव ही महत्वपूर्ण है?

श्री श्री रविशंकर: हाँ, पूरे भाव के साथ उच्चारण करिये, वही काफी है|

आपको कोई सज़ा नहीं मिलेगी | अगर कोई कुछ कहता भी है, तो उनसे कहिये कि आपके पास एक वकील है |  अगर कुछ होता है, तो मैं आपका वकील बन जाऊँगा | बहुत से पंडित लोगों में ये भ्रान्ति पैदा कर देते हैं, कि कुछ हो जाएगा | या महिलाओं को गायत्री मंत्र का उच्चारण नहीं करना चाहिये | ये सब गलत है, ऐसा कुछ भी नहीं है |इसे प्रेम से जपिये, डर से नहीं |

Sunday, July 24, 2016

Pizza

પીઝઝા ના એ આઠ ટુકડા..........

જરુર થી એકવાર તો વાંચજો

પત્ની એ કહ્યું – આજે ધોવા માટે વધારે કપડા નહિ કાઢતા કામવાળી બે દિવસ નહિ આવે...

પતિ: કેમ???

પત્ની: ગણપતી ના તહેવાર માટે તે તેની દીકરી ના છોકરાઓ ને મળવા જવાની છે. અને હા ગણપતિ ના તહેવાર માં તેને 500 રૂપિયા આપું બોનસ??

પતિ: કેમ?? હમણાં દિવાળી આવે જ છે ને ત્યારે આપશું

પત્ની: અરે ગરીબ છે બિચારી, દીકરી ને મળવા જાય છે તો તેને પણ સારું લાગશે અને આ મોંઘવારી માં આટલા પૈસા થી એ શું તહેવાર ઉજવશે?

પતિ: તું પણ જરૂર થી વધારે દયાળુ થઇ જા છો

પત્ની: ના ચિંતા નહિ કરો આજે આપણે પીઝઝા ખાવા જવાનો પ્રોગ્રામ હતો એ હું કેન્સલ કરી નાખું છુ. વાંસી પાવ ના એ 8 ટુકડા માં ખાલી ખોટા 500 રૂપિયા ઉડી જશે.

પતિ: વાહ...અમારા મોઢા માંથી પીઝઝા છીનવી ને બાઈ ની થાળી માં???

ત્રણ દિવસ પછી કચરું કાઢતી કામવાળી ને સાહેબે એ પૂછ્યું

પતિ:કેમ રહી રજા?

કામવાળી: બહુ સારી રહી સાહેબ...દીદી એ 500 રૂપિયા આપ્યા હતા ને... તહેવાર નું બોનસ

પતિ: તો જઈ આવી જમાઈ ને ત્યાં?? મળી લીધું દીકરી અને છોકરાઓ ને

કામવાળી: હા સાહેબ મજા આવી, બે દિવસ માં 500 રૂપિયા ખર્ચી નાખ્યા

પતિ: એમ?? શું કર્યું 500 રૂપિયા નું???

કામવાળી:

દીકરી ના છોકરા માટે ૧૫૦ રૂપિયા નો શર્ટ લીધો,

બેબી માટે 40 રૂપિયા ની ઢીંગલી,

દીકરી ને 50 રૂપિયા આપ્યા મીઠાઈ ના,

50 રૂપિયા નો મંદિર માં પ્રસાદ ચઢાવ્યો,

60 રૂપિયા તો આવવા જવા નું ભાડું થયું,

25 રૂપિયા ની બંગડી દીકરી ને આપી,

50 રૂપિયા નો બેલ્ટ જમાઈ ને આપ્યો

અને વધેલા 75 રૂપિયા દીકરી ના છોકરાઓ ને આપ્યા બુક અને પેન્સિલ લેવા માટે કચરા પોતા કરતી વખતે પુરેપુરો હિસાબ એના મોઢે હતો!!!

પતિ: 500 રૂપિયા માં આટલું બધું???? મન માં જ વિચાર આવવા લાગ્યા....
તેની સામે 8 ટુકડા કરેલા પીઝઝા ફરી રહ્યા હતા અને દરેક ટુકડો જાણે ઝેર લાગી રહ્યો હતો...

પોતાના એ એક પીઝઝા ના ખર્ચ ની બરાબરી તે કામવાળી બાઈ ના તહેવાર ના ખર્ચ સાથે કરી રહ્યો હતો.

પહેલો ટુકડો છોકરા ની શર્ટ નો,

બીજો ટુકડો દીકરી ની મીઠાઈ નો,

ત્રીજો મંદિર માં પ્રસાદ નો,

ચોથો ભાડા નો,

પાંચમો ઢીંગલી નો,

છઠ્ઠો બંગડી નો,

સાતમો જમાઈ ના બેલ્ટ નો

અને આઠમો બુક-પેન્સિલ નો.

આજ સુધી તેણે હમેશા પીઝઝા ની એક બાજુ જ જોઈ હતી ક્યારેય પણ પીઝઝા પાછળ થી કેવો દેખાય છે એ જોવાનો પ્રયત્ન નહોતો કર્યો. પરંતુ આજે આ કામવાળી બાઈ એ પીઝઝા ની બીજી બાજુ દેખાડી હતી...

પીઝઝા ના એ આઠ ટુકડા આજે તેને જીવન નો અર્થ સમજાવી ગયા હતા.
“જીવન માટે ખર્ચ” કે “ખર્ચ માટે જીવન” એને એક ઝાટકે સમજાય ગયું હતું.

You start dying slowly.

Pablo Neruda, Spanish poet
Nobel Prize for Literature in 1971
His Poem:

"You start dying slowly"

You start dying slowly ;
if you do not travel,
if you do not read,
If you do not listen to the sounds of life,
If you do not appreciate yourself.
You start dying slowly:

When you kill your self-esteem,
When you do not let others help you.
You start dying slowly ;

If you become a slave of your habits,
Walking everyday on the same paths…
If you do not change your routine,
If you do not wear different colours
Or you do not speak to those you don’t know.
You start dying slowly:

If you avoid to feel passion
And their turbulent emotions;
Those which make your eyes glisten
And your heart beat fast.
You start dying slowly:

If you do not risk what is safe for the uncertain,
If you do not go after a dream,
If you do not allow yourself,
At least once in your lifetime,
To run away.....
You start dying Slowly !!!

Love your life Love yourself...


पाब्लो नेरुदा, स्पेनिश कवि

1971 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार

उनकी कविता:


"आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं"


तुम धीरे-धीरे मरने लगते हो;

यदि आप यात्रा नहीं करते हैं,

यदि आप नहीं पढ़ते हैं,

यदि आप जीवन की आवाज़ नहीं सुनते हैं,

अगर आप खुद की सराहना नहीं करते हैं।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं:


जब आप अपने आत्मसम्मान को मारते हैं,

जब आप दूसरों को आपकी मदद करने नहीं देते।

तुम धीरे-धीरे मरने लगते हो;


यदि आप अपनी आदतों के गुलाम बन जाते हैं,

एक ही रास्तों पर हर रोज चलना ...

यदि आप अपनी दिनचर्या में बदलाव नहीं करते हैं,

यदि आप अलग-अलग रंग नहीं पहनते हैं

या आप उन लोगों से बात नहीं करते जिन्हें आप जानते नहीं हैं।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं:


यदि आप जुनून महसूस करने से बचते हैं

और उनकी अशांत भावनाएं;

जो आपकी आंखों को चमकदार बनाते हैं

और आपका दिल तेजी से धड़कता है।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं:


यदि आप जोखिम नहीं उठाते हैं तो अनिश्चित के लिए क्या सुरक्षित है,

यदि आप एक सपने के बाद नहीं जाते हैं,

यदि आप खुद को अनुमति नहीं देते हैं,

कम से कम एक बार अपने जीवनकाल में,

भाग जाना.....

तुम धीरे-धीरे मरने लगे !!!


अपने जीवन को प्यार करो अपने आप को प्यार करो ...

Saturday, July 23, 2016

અમીરી કે સમૃદ્ધિ !!

વોરન બફેટે ૩૧ બિલિયન ડોલરનું દાન કર્યું તે પછી  સીએનબીસીએ લીધેલા તેમના ટેલિવિઝન ઇન્ટરવ્યૂ દરમિયાન તેમણે કરેલાં કેટલાંક વિધાન વિશ્વભરના ધનપતિઓ માટે જ નહીં પરંતુ દુનિયાભરના તમામ લોકોએ તેમાંથી શીખવા જેવી વાત છે. કેટલીક મહત્ત્વપૂર્ણ વાતો આ પ્રમાણે છે :

(૧) મને મારી જિંદગીની કમાણીનો હિસ્સો પહેલી જ વાર ૧૧ વર્ષની વયે પ્રાપ્ત થયો હતો. એ વખતે મોંઘવારી નહોતી. તમે તમારાં બાળકોને ઇન્વેસ્ટ કરતાં શીખવો.

(૨) મેં ૧૪ વર્ષની વયે ન્યૂઝ પેપર્સનું વિતરણ કરીને જે બચત કરી હતી તેમાંથી મેં એક નાનકડું ફાર્મ ખરીદ્યું. તમે નાનકડી પણ બચત કરીને ઘણું મેળવી શકો છો. તમે તમારા સંતાનને કોઈ પણ ધંધો કરવા પ્રોત્સાહિત કરો. મેં ૧૧ વર્ષની વયે કમાણીની શરૂઆત કરી હતી, પરંતુ આજે મને લાગે છે કે મેં ઘણું મોડું શરૂ કર્યું. મારે તે કરતાંય વહેલાં કમાવાનું શરૂ કરવાની જરૂર હતી.

(૩) હું આજે પણ ત્રણ બેડરૂમના નાનકડા ઘરમાં રહું છું. આ ઘર મેં આજથી ૫૦ વર્ષ પહેલાં મિડટાઉન ઓમાહામાં ખરીદ્યું હતું. મારા આ નાનકડા ઘરમાં કોઈ દીવાલો કે બહાર તારની વાડ નથી. મારા ઘરમાં મારે જેની જરૂર છે તેટલી ચીજવસ્તુઓ જ ઉપલબ્ધ છે. તમારે જરૂર છે તે કરતાં વધુ કોઈ પણ ચીજની ખરીદી ન કરો. તમારાં બાળકોને પણ એમ જ શીખવો કે જરૂરિયાત કરતાં વધારાની ચીજવસ્તુઓની ખરીદી કરી પૈસા
ન બગાડે.

(૪) હું મારી મોટરકાર જાતે જ ચલાવું છું. ડ્રાઇવર રાખતો નથી. મારી આસપાસ સલામતી માટે પણ માણસો રાખતો નથી. તમે જે છો તે જ રહેવાના છો.

(૫) વિશ્વની મોટામાં મોટી પ્રાઇવેટ જેટ કંપનીનો માલિક હોવા છતાં હું મારા માટે પ્રાઇવેટ જેટ વિમાન રાખતો નથી. જીવનની દરેક બાબતમાં કરકસર કરો.

(૬) બર્કશાયર હાથવે નામની મારી પેઢી ૬૩ જેટલી કંપનીઓ ધરાવે છે.

આ તમામ કંપનીઓના સીઇઓને વર્ષમાં હું એક જ પત્ર લખું છું. તેમને મારે જે જોઈએ છે તે લક્ષ્યાંક આપી દઉં છું. હું નિયમિત મિટિંગો બોલાવતો નથી. વર્ષમાં મારા લક્ષ્યાંકો આપવા એક જ મિટિંગ બોલાવી બાકી તે લક્ષ્યાંક હાસલ કરવાનું કામ હું તેમને સોંપી દઉં છું. લક્ષ્યાંક પૂરો કરવાની જવાબદારી મારી કંપનીઓના વડાઓની છે.

(૭) હું યોગ્ય વ્યક્તિને જ યોગ્ય કામ આપું છું. મતલબ કે ‘રાઇટ પિપલ’ ને ‘રાઇટ જોબ’ આપું છું.

(૮) હું મારા સીઇઓને એ નિયમો આપું છું, રુલ નંબર એક : શેર હોલ્ડરનાં નાણાં ડૂબવાં જોઈએ નહીં. રુલ નંબર બે : પહેલા નંબરના રુલનો કદી ભંગ થવો જોઈએ નહીં.
તમે એક ગોલ નક્કી કરો અને તમારા માણસોને ગોલ પર ધ્યાન કેન્દ્રિત કરે તેવી વ્યવસ્થા કરો.

(૯) મોટા મેળાવડાઓ કે હાઈ સોસાયટીના જમેલાઓમાં જઈ હું સમય બગાડતો નથી. એમ કરવાને બદલે હું મારા ઘરે જઈ પોપકોર્ન ખાતાં ખાતાં ટેલિવિઝન જોવાનું પસંદ કરું છું.

(૧૦) તમે જે નથી તેનો દેખાડો કરવાનો પ્રયાસ કદી ન કરશો. હું જે છું તેવો જ સમાજમાં દેખાઉં તે જરૂરી છે. તમને જે ગમે છે તે પ્રમાણે જીવનનો આનંદ માણો.

(૧૧) મારી પાસે કોઈ સેલ ફોન નથી. હું મારા ટેબલ પર કમ્પ્યુટર પણ રાખતો નથી.

(૧૨) હું કોઇ ક્રેડિટ કાર્ડ રાખતો નથી. ક્રેડિટ કાર્ડ કદી રાખવું નહીં. હું બેન્કોમાંથી લોન લેતો નથી.

(૧૩) એક વાત યાદ રાખો કે પૈસો માનવીનું સર્જન કરતો નથી, પરંતુ માનવી જ પૈસાનું સર્જન કરે છે.

(૧૪) બની શકે તેટલી સાદગીથી જીવન જીવો.

(૧૫) બીજાઓ જે કરે છે તેમ ન કરો. બીજાઓ જે કહે છે તે સાંભળો અને તમને યોગ્ય લાગે તેમ જ કરો.

(૧૬) કોઇ પણ બ્રાન્ડનેમ પાછળ પાગલ ન બનો. બ્રાન્ડનેમ જોઈને ખરીદી ન કરો. તમને જેમાં સુવિધા લાગતી હોય તે જ વસ્ત્રો, ચશ્માં કે જૂતાં પહેરો.

(૧૭) બિનજરૂરી ચીજવસ્તુઓની ખરીદી કરી પૈસા બરબાદ ન કરો. તમને જેની જરૂરિયાત છે તે જ વસ્તુઓ ખરીદો.

(૧૮) આખરે તમારું જીવન એ તમારું જ છે. બીજાઓ તમારા જીવન પર રાજ કરે તેવી તક બીજાઓને ન આપો. તમને જરૂર જ ન હોય છતાં કોઈ બ્રાન્ડનેમવાળી જ ઘડિયાળ તમે ખરીદો છો ત્યારે એ બ્રાન્ડ ધરાવતી કંપની આડકતરી રીતે તમારી પર રાજ કરે છે તે સત્ય સમજો.

(૧૯) વિશ્વના સુખી લોકો પાસે વિશ્વની શ્રેષ્ઠ બ્રાન્ડ ધરાવતી ચીજવસ્તુઓ હોતી જ નથી. તેમની પાસે જે ઉપલબ્ધ છે તેની જ તેઓ કદર કરે છે.
વિશ્વના બીજા નંબરના સહુથી ધનિક એવા વોરન બફેટને વિશ્વના સહુથી વધુ ધનવાન એવા બિલ ગેટ્સે એક વાર મળવાનું નક્કી કર્યું. બિલ ગેટ્સ માનતા હતા કે મારી અને વોરન બફેટ વચ્ચે કાંઈ જ ‘કોમન’ નથી. તેથી બિલ ગેટ્સે માન્યું કે વોરન બફેટ સાથે મારી અડધો કલાકની મિટિંગ પૂરતી છે, પરંતુ બિલ ગેટ્સ વોરન બફેટને મળવા ગયા અને વોરન બફેટ પાસેથી તેઓ પૂરા ૧૦ કલાક બાદ ઊભા થયા. તે દિવસ બાદ બિલ ગેટ્સ વોરન બફેટના ભક્ત અને પ્રશંસક બની ગયા.

Tuesday, July 12, 2016

બચત - બીજો ભાઈ

આ કોઇ કાલ્પનિક વાર્તા નહી પરંતુ વાસ્તવિક  હકીકત છે.

કોઇ કામ માટે ગામડેથી રાજકોટમાં આવેલા એક પટેલ પ્રૌઢ એમના સંબંધી સાથે ફરવા માટે બહાર ગયા. ત્યાં ગામડાના આ પટેલ બાપાનો પરિચય એની જ ઉંમરના એક વણિક સાથે થયો. બંને વડીલો વાતે વળગ્યા.

વણિક : શું ચાલે છે બાપા ? મજામાંને ?

પટેલ : હા હો મજામાં. ભગવાનની બહુ દયા છે ગામડે ખેતીવાડી કરીએ અને મજા કરીએ.

વણિક : ગામડે કોણ કોણ રહો છો? પટેલ : અરે અમે તો ડોશી-ભાભો બે જ છીએ. બે દિકરા છે અને બંને સુરત રહે છે.

વણિક : તમને કોઇ બિમારી-બિમારી આવે કે તકલીફ પડે તો પછી દિકરા-વહુ સુરતથી આવે કે નહી?

પટેલ : આડા દિવસે તો ન આવી શકે પણ દિવાળીની રજા પડે ત્યારે થોડા દિવસ આવે.

વણિક : જ્યારે વહુ અને દિકરાઓ દિવાળી પર ઘરે આવે ત્યારે તમે કંઇ ભેટ આપો કે નહી ?

પટેલ : હા, આપુને. બંને વહુને પગે લાગવાના 100-100 રૂપિયા આપુ.

વણિક : અરે બાપા, 100-100 આપો તો પછી તમારી બીમારી વખતે સુરતથી અહીંયા કોઇ લાંબુ ન થાય ! એ તો 10000નો ડટ્ટો દેવો પડે.

પટેલ : પણ હું આટલી બધી રકમ ક્યાંથી આપુ ? મારે થોડી કંઇ ફેકટરીઓ ચાલે છે ? ખેતર છે એ પણ દિકરાઓને ભાગ પાડી દીધા છે અને દિકરાઓ જ્યારે દિવાળી પર આવે ત્યારે અમને ખોરાકીના આપી જાય છે એમાંથી માંડ ઘર ચાલે તો પછી 10000નો ડટ્ટો ક્યાંથી આપીએ ?

વણિક : કેમ, તમે કંઇ બચત નથી કરી ?

પટેલ : ના ભાઇ ના, એવી કંઇ બચત નથી કરી. બધુ દિકરાઓને આપી દીધુ હવે દિકરાઓ સાચવશે.

વણિક : પણ માની લો કે દિકરા ન સાચવે અને મોટી બીમારીમાં ખર્ચ ઉપાડવાની ના પાડી દે તો ?

પટેલ : એવુ ના બને , અને જો થાય તો પછી ટુટીંયુ વાળીને પડ્યા રહીએ. નસીબમાં હોય એમ થાય.

વણિક : બાપા, નસિબ તો આપડે જેવુ લખવુ હોય એવુ લખી શકાય. મને અને મારા પત્નિને મારો દિકરો અને દિકરાની વહુ ખુબ સાચવે છે એ મારા સારા નસિબને કારણે નહી મારા નાણાકિય આયોજનના કારણે.

પટેલ : લે એ કેવી રીતે ?

વણિક : જુઓ સાંભળો , મને 18 વર્ષની ઉંમરે નોકરી મળેલી. સરકારમાં આરોગ્ય ખાતામાં લાગ્યો અને પહેલો પગાર 75 રૂપિયા મળ્યો. પહેલો પગાર લઇને મારા પિતાજીના હાથમાં આપ્યો ત્યારે પિતાજીએ મને પુછેલુ કે બેટા તને 75ને બદલે 65 રૂપિયામાં નોકરી મળી હોત તો તું એ નોકરી સ્વિકારત કે નહી ? મેં હા પાડી એટલે એમણે કહ્યુ બસ આજથી એમ માની લે કે તારો પગાર 10% ઓછો છે અને આજીવન 10% ઓછો જ રહેવાનો છે એ 10% રકમ તારે પોસ્ટ ઓફિસમાં ખાતુ ખોલાવીને એમાં જમાં કરાવવાની અને એમાંથી ક્યારેય કંઇ ઉપાડ કરવાનો જ નહી. પોસ્ટઓફિસમાં રકમ ભરીને પછી ભુલી જ જવાનુ કે મારી કોઇ રકમ પોસ્ટ ઓફિસમાં છે.

પટેલ : પણ આટલી નાની રકમ જમા કરાવો તો એનાથી શું ફેર પડે ?

વણિક : મારા ભાઇ, આ નાની બચતથી લાંબાગાળે બહુ જ મોટો ફેર પડે. મેં મહીને માત્ર 10 રૂપિયાની બચતથી શરૂઆત કરેલી અને જેમ જેમ સમય પસાર થતો ગયો તેમ તેમ મારો પગાર પણ વધતો ગયો એટલે 10% લેખે થતી બચતની રકમ પણ વધતી ગઇ. મેં 35 વર્ષ નોકરી કરી અને આ દરમિયાન કરેલી બચતની રકમ અત્યારે વ્યાજ સહીત 96 લાખ રૂપિયા છે. આ 96 લાખનું મને દર મહીને 60000 વ્યાજ મળે છે જેમાંથી 30000 મારો પૌત્ર જે 3 વર્ષનો છે તેના નામનું પોસ્ટમાં ખાતુ ખોલાવીને તેમાં જમાં કરાવું છુ અને બાકીના 30000 દર મહીને મારા દિકરાની વહુના હાથમાં આપુ છું અમને સાચવવા માટે.

પટેલ : ઓહો....આટલા બધા રૂપિયા આપો તો તો પછી તમને તમારા દિકરાની વહુ હથેળીમાં જ રાખે ને. પણ તમારે વાપરવા માટે કંઇ જરૂર પડે તો તમને વહુ પાછા પૈસા આપે ?

વણિક : વહુ પાસે માંગવાની જરૂર જ નથી કારણકે મને દર મહીને 17000 પેન્શન મળે છે એમાંથી જરૂર પડે તો વાપરીએ અને બાકી મહીને 2000 ઉપાડીને મારા પૌત્રને દર રવિવારે ફરવા માટે બહાર લઇ જાવ અને એને પણ જલસા કરાવુ. પેન્શનમાંથી બાકીના જે 15000 વધે એ ઉપાડીને તેની એફડી કરાવી મારી દિકરીને ભેટમાં આપુ છું એફડી કરાવેલ હોવાથી એ તાત્કાલીક વાપરી પણ ન શકે.

પટેલ : વાહ , તમારુ કહેવું પડે હો. તમે પાક્કા વાણીયા છો. તમારી પાસેથી તો ઘણું શીખવા જેવુ છે. અમારે તો હવે ક્યાં લાંબુ ખેંચવાનું છે પણ આ નવી પેઢી તમે કર્યુ એમ કરે તો પાછલી જીંદગીમાં ઓશીયાળા ન રહેવુ પડે એટલુ પાક્કુ.

મિત્રો, બચતનું મહત્વ સમજીને આજથી જ બચત કરવાનો સંકલ્પ કરીએ અને આપણા ભવિષ્યને વધુ ઉજળુ કરીએ.

Saturday, July 9, 2016

Suicide....

આપઘાત કરતા પહેલાં સો વાર વિચારવું...

હ્રદય ને સ્પર્શી જાય એવી વાત

તે એક ગરીબ માણસ હતો,તેનુ એક સપનું હતું કે તેની દીકરી બેસ્ટ ડોક્ટર બને...

તેની દીકરી રાજકુમારી જેવી હતી , તે દિવસ દીકરી ની ઉચ્ચતર શાળા ના પરિણામ નો દિવસ હતો.., અને તે ઇચ્છતો હતો એવું જ પરિણામ આવ્યું,દીકરી રાજ્ય માં પ્રથમ આવી...

પિતા : હું આજે બહુ ખુશ છુ બેટા, તારે જે જોઈએ એ માંગ હું તને લાવી આપીશ.

દીકરી : પપ્પા, મારે પેલો ડ્રેસ જોઈએ છે જે મેં તમને એ દિવસે બતાવ્યો હતો,પણ એ ૨૦૦૦ રૂપિયા નો હતો એટલે મેં તમને ત્યારે કહ્યું ન હતું, શું તમે મને એ ડ્રેસ લાવી આપશો ?

પિતા : સારું બેટા
( પરંતુ તેની બધી બચત એક કર્યા પછી પણ તેમાં ૩૦૦ રૂપિયા ખૂટતા હતા તેમ છતાં એમને આ ડ્રેસ કેવી રીતે ખરીદ્યો હશે ?)

પત્ની : તમે આટલા પૈસા ક્યાંથી લાવ્યા ?

પતિ : મારી બચત માંથી અને જે ખૂટતા હતા એ મારુ લોહી વેચી ને લાવ્યો,હું મારી દીકરી ને નિરાશ કરવા નથી માંગતો.

હવે તે દીકરી તેના ડૉક્ટરી ના છેલ્લા વર્ષ માં હતી,પરતું તેની ફી ૮૦૦૦૦ રૂપિયા હતી.

પત્ની : હવે તમે આટલા પૈસા ક્યાંથી લાવ્યા,તમે કોઈ બેંક માં ચોરી કરી ?

પતિ : ના , મેં તે દિવસે જે વ્યક્તિ ને મારુ લોહી આપ્યું હતું તેની કિડની ખરાબ થઇ ગઈ હતી, આજે મેં મારી એક કિડની તેને વેચી ને આપણી દીકરી ની ફી ભરી.મેં કોઈ બેંક માં ચોરી નથી કરી, અને કિડની ની વાત તું દીકરી ને ના કરતી હું નથી ઇચ્છતો કે તેને દુઃખ થાય...

પરિણામ નો દિવસ આવી ગયો,પિતા ઇચ્છતા હતા કે દીકરી ઘર માં ડોક્ટર બની ને આવે, પરંતુ....

ઘરે *દીકરી ની લાશ આવી,પ્રેમ માં દગો મળવાથી દીકરી એ આપઘાત કરી લીધો......*

હવે સાચું કહો મર્યું કોણ ?

હા, પ્રેમ બધું જ છે પરંતુ જો તમે ક્યારે તમારો પ્રેમ ઘુમાવીદો તો એક ઊંડો શ્વાશ લો અને તમારા માતા પિતા નું વિચારો....

કેમકે તમને કદાચ બીજો પ્રેમ મળી જશે,
પરંતુ તમારા માતા પિતા ને ફરી એમનો રાજકુમાર/રાજકુમારી નહિ મળે......

લેખક-અજ્ઞાત

Saturday, June 4, 2016

Spending to live not live to spend....

A lady to her husband: Avoid giving too many clothes for laundry.

Husband: What happened?

Wife: The maid won’t be coming for work for a couple of days.

Husband: Why?

Wife: She’s going to see her granddaughter over to her daughters place over the Ganesh Chaturthi holidays.

Husband: Alright, I’ll keep that in mind.

Wife: Before I forget, how about we offer her a festive bonus? Rs. 500?

Husband: But why? Diwali is around the corner, why don’t we just give her the money then?

Wife: Oh, no… She’s a poor lady, works as a domestic help. She’s going to see her daughter. With her meagre income, how would she be able to enjoy a good holiday? Poor thing!

Husband: There you go! Getting overly sentimental again!

Wife: Don’t worry about the money; let’s cancel our plan for pizza for dinner tonight. No point wasting money over eight slices of stale bread.

Husband: Great! So now we have to give up on our pizza night so the maid can get a bonus?!

Three days later, when the maid is back at work, the lady’s husband asked her.

Husband: So, how was your holiday?

Maid: It was wonderful, sir. Didi had given me 500 as a festive bonus that added to the joy.

Husband: I heard you went over to your daughters place. Met your granddaughter?

Maid: Yes, sir. I had such a great time. We spent 500, all of it in just two days.

Husband: What did you buy with that money?

Maid: I bought my granddaughter a shirt for Rs. 150 and a doll for Rs. 40, sweets for my daughter and to offer at the temple for Rs. 50, each, spent Rs. 60 on the rent, bought my daughter bangles for Rs. 25, and a nice belt for my son in law for Rs. 50. We spent the rest of the money buying notebooks and stationery for my granddaughter.

Husband: All that for Rs. 500?

In a shocked state he started thinking and seeing pizza in his head.

Each piece of the pizza started buzzing in his head. He started comparing the pizza’s price with the maid’s festive expenses over her family.

He started imagining each piece of the pizza as different things she bought for her family like kids dress, sweets, rent, the bangles she bought, the belt she bought for her son in law, the books and pencil she bought.

He had only imagined the delicious part of the pizza, he had never thought of the other plain and dry part of it and today because of his maid he could understand the other part of the coin or the pizza. A simple 8 pieced pizza taught some reality of life.

This incident made him realize the meaning of “Spending to live not live to spend”.